AOR Examination Paper-IV | 86 Leading Judgments with Hindi Analysis

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AOR Examination Paper-IV | 86 Leading Judgments with Hindi Analysis

86Total Cases
1973Earliest Case
2025Latest Case
11Legal Domains
# CASE NAME & CITATION विषय मुख्य FINDING / कोर्ट अवलोकन
1
Kesavananda Bharati v. State of Kerala
[1973] Suppl. SCR 1; (1973) 4 SCC 225
संविधानबेसिक स्ट्रक्चर सिद्धांत: संसद संविधान संशोधन कर सकती है, परंतु मूल ढांचे (लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्यायिक समीक्षा, संघवाद) को नष्ट नहीं कर सकती। अनुच्छेद 368 पर निहित सीमाएँ लागू।
2
Maneka Gandhi v. Union of India
[1978] 2 SCR 621; (1978) 1 SCC 248
संविधानअनुच्छेद 21 व्याख्या: 'कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया' उचित, न्यायसंगत और युक्तिसंगत होनी चाहिए। अनुच्छेद 14, 19, 21 का गोल्डन ट्रायंगल। विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता में निहित।
3
Minerva Mills Ltd. v. Union of India
[1981] 1 SCR 206; (1980) 3 SCC 625
संविधानFR व DPSP सामंजस्य: मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों के बीच संतुलन मूल संरचना है। न्यायिक समीक्षा को समाप्त करने वाला संशोधन अमान्य। संविधान की सर्वोच्चता बरकरार।
4
Sharad Birdhi Chand Sarda v. State of Maharashtra
[1985] 1 SCR 88; (1984) 4 SCC 116
आपराधिकपरिस्थितिजन्य साक्ष्य: केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर दोषसिद्धि के 5 स्वर्ण सिद्धांत: पूर्ण सिद्धि, केवल दोष की ओर इशारा, निर्दोषता की हर संभावना खारिज, श्रृंखला पूर्ण, कोई विरोधाभास नहीं।
5
A.R. Antulay v. R.S. Nayak & Anr.
[1988] 1 Suppl. SCR 1; (1988) 2 SCC 602
संविधानप्राकृतिक न्याय: सुनवाई का अधिकार मौलिक है। उल्लंघन से आदेश शून्य। न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर आदेश नहीं दे सकता। समीक्षा शक्ति स्पष्ट सीमाओं में।
6
Kihoto Hollohan v. Zachillhu
[1992] 1 SCR 686; (1992) Supp 2 SCC 651
संविधानदल बदल विरोधी कानून: 10वीं अनुसूची वैध। स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन, परंतु अंतरिम चरण में हस्तक्षेप सीमित। राजनीतिक दलों की स्थिरता संविधान के अनुकूल।
7
Indra Sawhney v. Union of India
[1992] 2 Suppl. SCR 454; 1992 Supp (3) SCC 217
संविधानआरक्षण सीमा व क्रीमी लेयर: अनुच्छेद 16(4) आरक्षण 50% से अधिक नहीं। OBC में क्रीमी लेयर बाहर। आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं। कैरी फॉरवर्ड रूल 50% सीमा के अधीन।
8
S.R. Bommai v. Union of India
[1994] 2 SCR 644; (1994) 3 SCC 1
संविधानअनुच्छेद 356 न्यायिक समीक्षा: राष्ट्रपति शासन माला फाइड या अप्रासंगिक आधार पर नहीं। फ्लोर टेस्ट ही बहुमत का एकमात्र विश्वसनीय परीक्षण। धर्मनिरपेक्षता मूल संरचना।
9
L. Chandra Kumar v. Union of India
[1994] 6 Suppl. SCR 261; (1995) 1 SCC 400
संविधानन्यायाधिकरण बनाम HC: न्यायाधिकरण HC के पूरक हैं, प्रतिस्थापक नहीं। अनुच्छेद 226/227 शक्ति अहस्तांतरणीय। न्यायाधिकरणों को स्वतंत्रता और योग्यता मानक पूरे करने होंगे।
10
Vellore Citizens Welfare Forum v. Union of India
[1996] 5 Suppl. SCR 241; (1996) 5 SCC 647
पर्यावरणसावधानी व प्रदूषक भुगतान: Precautionary Principle व Polluter Pays अनुच्छेद 21 का हिस्सा। सतत विकास संतुलन का उपकरण। उद्योग को पर्यावरण हानि का भार वहन करना होगा।
11
D.K. Basu v. State of West Bengal
[1996] 10 Suppl. SCR 284; (1997) 1 SCC 416
आपराधिकगिरफ्तारी दिशा-निर्देश: 11 अनिवार्य नियम: नाम पता वाला मेमो, परिवार/मित्र को सूचना, चिकित्सीय जाँच, वकील से मिलने का अधिकार। हिरासत प्रताड़ना रोकने के लिए कठोर अनुपालन।
12
Mafatlal Industries Ltd. v. Union of India
[1996] 10 Suppl. SCR 585; (1997) 5 SCC 536
करअनुचित enrichment सिद्धांत: कर रिफंड केवल तभी जब कर का भार उपभोक्ता पर न डाला गया हो। सांविधिक प्रावधान सामान्य कानून पर हावी। कर संग्राहक राज्य का ट्रस्टी है।
13
Vishaka v. State of Rajasthan
[1997] 3 Suppl. SCR 404; (1997) 6 SCC 241
मानवाधिकारकार्यस्थल यौन उत्पीड़न: विशाखा दिशा-निर्देश जारी। CEDAW का अनुप्रयोग। शिकायत समिति, रोकथाम उपाय, नियोक्ता की जिम्मेदारी। कानून बनने तक ये दिशा-निर्देश बाध्यकारी।
14
Githa Hariharan v. RBI
[1999] 1 SCR 669; (1999) 2 SCC 228
पारिवारिकअभिभावकता समानता: हिंदू माइनर एक्ट में 'after' की व्याख्या 'in absence of' के रूप में। माँ पिता की अनुपस्थिति में प्राकृतिक अभिभावक। लैंगिक भेदभाव समाप्त, अनुच्छेद 15 संरक्षण।
15
Rupa Ashok Hurra v. Ashok Hurra
[2002] 2 SCR 1006; (2002) 4 SCC 388
प्रक्रियाक्यूरेटिव याचिका: रिव्यू खारिज के बाद अंतिम न्यायिक उपाय। प्राकृतिक न्याय उल्लंघन या गंभीर पूर्वाग्रह में फाइल। 3 वरिष्ठतम न्यायाधीशों की बेंच। दुर्लभतम मामलों में ही स्वीकार्य।
16
Pradeep Kumar Biswas v. IICB
[2002] 3 SCR 100; (2002) 5 SCC 111
संविधान'राज्य' परिभाषा विस्तार: अनुच्छेद 12 के तहत वित्तीय, कार्यात्मक, प्रशासनिक नियंत्रण आधार पर संस्थाएँ 'राज्य'। मौलिक अधिकारों का क्षैतिज प्रभाव संभव। सार्वजनिक कर्तव्य निर्वहन महत्वपूर्ण।
17
P. Rama Chandra Rao v. State of Karnataka
[2002] 3 SCR 60; (2002) 4 SCC 578
संविधानसंशोधन शक्ति सीमा: संसद की शक्ति मूल संरचना को छू नहीं सकती। न्यायिक समीक्षा और मौलिक अधिकार अभिन्न अंग। संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने के लिए न्यायपालिका सतर्क।
18
T.M.A. Pai Foundation v. State of Karnataka
[2002] 3 Suppl. SCR 587; (2002) 8 SCC 481
शिक्षाअल्पसंख्यक संस्थान स्वायत्तता: अनुच्छेद 30(1) प्रवेश व शुल्क निर्धारण में स्वायत्तता देता है। राज्य नियमन केवल उचित हित/मानक बनाए रखने के लिए। व्यावसायीकरण रोकना आवश्यक।
19
P.A. Inamdar v. State of Maharashtra
(2004) 8 SCC 139
आरक्षणअल्पसंख्यक संस्थानों में आरक्षण: राज्य-प्रायोजित आरक्षण 30(1) वाले संस्थानों पर लागू नहीं। अनुच्छेद 15(5) के बावजूद अल्पसंख्यक अधिकार सुरक्षित। गुणवत्ता और समानता संतुलन।
20
Technip SA v. SMS Holding
[2005] 1 Suppl. SCR 223; (2005) 5 SCC 465
कंपनीविदेशी विलय/अधिग्रहण: RBI/FEMA अनुमोदन अनिवार्य। कंपनी अधिनियम व विदेशी मुद्रा कानून समन्वय। राष्ट्रीय हित व पारदर्शिता प्राथमिक। विदेशी निवेशक अधिकार संरक्षित।
21
S.B.P. & Co. v. Patel Engineering
[2005] 4 Suppl. SCR 688; (2005) 8 SCC 618
मध्यस्थतामुख्य न्यायाधीश की भूमिका: अनुच्छेद 11 नियुक्ति 'न्यायिक' कार्य है, प्रशासनिक नहीं। HC/SC हस्तक्षेप सीमित। मध्यस्थता समझौते की वैधता प्राथमिक जाँच योग्य।
22
Rameshwar Prasad v. Union of India
[2006] 1 SCR 562; (2006) 2 SCC 1
चुनावविधानसभा भंग शक्ति: राज्यपाल/राष्ट्रपति शक्ति संवैधानिक, परंतु दुरुपयोग नहीं। न्यायिक समीक्षा उपलब्ध यदि mala fide या असंवैधानिक उद्देश्य। लोकतांत्रिक स्थिरता प्राथमिक।
23
I.R. Coelho v. State of Tamil Nadu
[2007] 1 SCR 706; (2007) 2 SCC 1
संविधान9वीं अनुसूची न्यायिक समीक्षा: 9वीं अनुसूची में डाले कानून भी बेसिक स्ट्रक्चर टेस्ट के अधीन। 1973 के बाद के संशोधन स्वतः संरक्षित नहीं। न्यायपालिका अंतिम संरक्षक।
24
Common Cause v. Union of India
[2008] 6 SCR 262; (2008) 5 SCC 511
आपराधिकजमानत सिद्धांत: जमानत नियम, अपवाद नहीं। देरी से मुकदमा चलना जमानत आधार। अनुच्छेद 21 उल्लंघन रोकने के लिए त्वरित सुनवाई। कैद अवधि कटौती स्पष्ट।
25
State of West Bengal v. CPDR
[2010] 2 SCR 979; (2010) 3 SCC 571
मानवाधिकारविरोध प्रदर्शन अधिकार: शांतिपूर्ण विरोध अनुच्छेद 19(1)(a) व 19(1)(b) संरक्षित। राज्य को सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित करनी होगी। अतिरिक्त प्रतिबंध असंवैधानिक।
26
Selvi v. State of Karnataka
[2010] 5 SCR 381; (2010) 7 SCC 263
आपराधिकवैज्ञानिक जाँच सीमाएँ: नार्को, पॉलीग्राफ, BEAP बिना स्वैच्छिक सहमति निषिद्ध। अनुच्छेद 20(3) स्व-अपराधीकरण सुरक्षा। मानसिक गोपनीयता अनुच्छेद 21 में निहित।
27
Re: Special Reference No. 1 of 2012
[2012] 9 SCR 311; (2012) 10 SCC 1
संविधान2G स्पेक्ट्रम रद्दीकरण: राष्ट्रपति संदर्भ पर सलाहकार अधिकार क्षेत्र। प्राकृतिक संसाधन सार्वजनिक ट्रस्ट। पारदर्शिता, नीलामी, समान अवसर अनिवार्य। मनमाना आवंटन अमान्य।
28
Republic of Italy v. Union of India
[2013] 4 SCR 595; (2013) 4 SCC 721
अंतर्राष्ट्रीयएनरोनी क्षेत्राधिकार: अंतर्राष्ट्रीय जलसीमा व UNCLOS लागू। क्षेत्राधिकार टकराव में न्यायाधिकरण गठन। राजनयिक संवाद व अंतर्राष्ट्रीय कानून प्राथमिक। भारतीय न्यायालय सीमित हस्तक्षेप।
29
Novartis AG v. Union of India
[2013] 13 SCR 148; (2013) 6 SCC 1
पेटेंटधारा 3(d) वैधता: दवाओं के नए रूपों पर पेटेंट के लिए 'उन्नत दक्षता' साबित करनी होगी। एवरग्रीनिंग रोकी गई। TRIPS लचीलापन सार्वजनिक स्वास्थ्य हित में। जनरिक दवाएँ संरक्षित।
30
Dr. Balram Prasad v. Dr. Kunal Saha
[2013] 12 SCR 30; (2014) 1 SCC 384
चिकित्साचिकित्सा लापरवाही मुआवजा: उपभोक्ता फोरम अधिकार क्षेत्र स्पष्ट। उच्च मुआवजा पीड़ित राहत व डिटेरेंट के लिए। चिकित्सीय मानक उल्लंघन गंभीर। विशेषज्ञ समिति राय बाध्यकारी नहीं, परंतु महत्वपूर्ण।
31
Lalita Kumari v. Govt. of U.P.
[2013] 14 SCR 713; (2014) 2 SCC 1
आपराधिकFIR अनिवार्यता: संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना बाध्यकारी। प्रारंभिक जाँच अत्यंत सीमित मामलों में। विलंब/इनकार दंडनीय। पीड़ित अधिकार व पुलिस जिम्मेदारी स्पष्ट।
32
NALSA v. Union of India
[2014] 5 SCR 119; (2014) 5 SCC 438
मानवाधिकारतृतीय लिंग मान्यता: ट्रांसजेंडर व्यक्ति तृतीय लिंग। अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 समान अधिकार। आरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पहचान दस्तावेज निर्देश। सामाजिक न्याय प्राथमिक।
33
Pramati Educational Trust v. Union of India
[2014] 11 SCR 712; (2014) 8 SCC 1
शिक्षाRTE आरक्षण छूट: 30(1) वाले अल्पसंख्यक संस्थान RTE एक्ट 12(1)(c) से छूट। सहायता प्राप्त/अप्राप्त में अंतर। शिक्षा का अधिकार व अल्पसंख्यक अधिकार संतुलन।
34
Kailash Nath Associates v. DDA
[2015] 1 SCR 627; (2015) 4 SCC 136
नागरिकअनुबंध जुर्माना सीमा: भंग पर जुर्माना वास्तविक नुकसान के अनुपात में। अनुचित जुर्माना वसूली नहीं। भारतीय अनुबंध अधिनियम धारा 74 व्याख्या। दंड बनाम पूर्वानुमानित नुकसान स्पष्ट।
35
Shreya Singhal v. Union of India
[2015] 5 SCR 963; (2015) 5 SCC 1
आईटीधारा 66A असंवैधानिक: अस्पष्ट व अतिव्यापी होने के कारण रद्द। ऑनलाइन अभिव्यक्ति स्वतंत्रता संरक्षित। इंटरमीडियरी गाइडलाइंस स्पष्ट। ज्ञान/इरादा आधारित जिम्मेदारी।
36
SC AOR Association v. Union of India
[2015] 13 SCR 1; 2016 (5) SCC 1
न्यायपालिकाNJAC असंवैधानिक: NJAC अधिनियम रद्द। कॉलेजियम बहाल। न्यायिक स्वतंत्रता मूल संरचना। कार्यपालिका हस्तक्षेप सीमित। पारदर्शिता व मेरिट आधारित नियुक्ति आवश्यक।
37
Union of India v. V. Sriharan
[2015] 14 SCR 613; 2016 (7) SCC 1
आपराधिकआजीवन कारावास व्याख्या: 'पूरी प्राकृतिक आयु' तक कैद संभव। मृत्युदंड पुष्टि/रूपांतरण में SC भूमिका। दुर्लभतम के दुर्लभ सिद्धांत। समाज हित व पीड़ित न्याय प्राथमिक।
38
Gujarat Urja Vikas v. EMCO
[2016] 1 SCR 857; (2016) 11 SCC 182
मध्यस्थताधारा 34 चुनौती सीमा: पंचाट को चुनौती केवल निर्धारित आधारों पर। पुनर्विचार निषिद्ध। न्यायालय हस्तक्षेप अत्यंत संकुचित। मध्यस्थता स्वायत्तता सम्मानित।
39
Mukesh v. State (NCT Delhi)
[2017] 6 SCR 1; (2017) 6 SCC 1
आपराधिक2012 दिल्ली दुष्कर्म मामला: मृत्युदंड पुष्टि। दुर्लभतम के दुर्लभ श्रेणी। पीड़ित गरिमा व समाज संदेश प्राथमिक। विलंब दया याचिका में ध्यान योग्य। कानून का भय आवश्यक।
40
Excel Crop Care v. CCI
[2017] 5 SCR 901; (2017) 8 SCC 47
प्रतिस्पर्धाCCI जुर्माना अनुपात: जुर्माना लाभ या टर्नओवर आधारित गणना स्पष्ट। अनुपातहीनता निषिद्ध। प्रतिस्पर्धा संरक्षण व उपभोक्ता हित संतुलन। दंड उद्देश्य सुधारात्मक।
41
Common Cause v. Union of India
[2017] 13 SCR 361; (2017) 9 SCC 499
संविधाननिष्क्रिय यूथेनेसिया वैध: लिविंग विल के तहत जीवन समर्थन हटाना वैध। प्राकृतिक मृत्यु अधिकार अनुच्छेद 21 में। गरिमापूर्ण अंत जीवन प्राथमिक। चिकित्सीय बोझ कम करना नैतिक।
42
Shayara Bano v. Union of India
[2017] 9 SCR 797; (2017) 9 SCC 1
पारिवारिकत्रिपल तलाक असंवैधानिक: तत्काल तलाक मनमाना व इस्लाम सिद्धांत विरुद्ध। मुस्लिम महिला अधिकार संरक्षित। समानता व गरिमा प्राथमिक। विधानी सुधार आवश्यक।
43
K.S. Puttaswamy v. Union of India
[2017] 10 SCR 569; (2017) 10 SCC 1
संविधानगोपनीयता मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 21 व भाग III अभिन्न अंग। डेटा संरक्षण, सर्विलांस नियंत्रण अनिवार्य। आनुपातिकता व कानून का शासन लागू। डिजिटल युग में संरक्षण आवश्यक।
44
Common Cause v. Union of India
[2018] 6 SCR 1; 2018 (5) SCC 1
संविधानलिविंग विल कार्यान्वयन: विस्तृत दिशा-निर्देश जारी। मेडिकल बोर्ड, जिलाधिकारी भूमिका स्पष्ट। प्रक्रिया सरल बनाई गई। रोगी स्वायत्तता सम्मानित। परिवार सहमति महत्वपूर्ण।
45
MC Ujjain v. BVG India
[2018] 6 SCR 861; 2018 (5) SCC 462
सेवाठेका कर्मचारी समान वेतन: समान काम, समान वेतन सिद्धांत लागू। नियमित/ठेका भेदभाव निषिद्ध। शोषण रोकना राज्य कर्तव्य। न्यूनतम वेतन व सुरक्षा अनिवार्य।
46
Shakti Vahini v. Union of India
[2018] 3 SCR 770; (2018) 7 SCC 192
मानवाधिकारऑनर किलिंग रोकथाम: प्रेम विवाह में हस्तक्षेप गंभीर अपराध। पुलिस संरक्षण अनिवार्य। विशेष दिशा-निर्देश जारी। व्यक्तिगत Choice संवैधानिक अधिकार। सामाजिक रूढ़िवादिता निषिद्ध।
47
Navtej Singh Johar v. Union of India
[2018] 7 SCR 379; (2018) 10 SCC 1
संविधानधारा 377 रद्द: सहमति वाले समलैंगिक संबंध अपराध नहीं। अनुच्छेद 14, 15, 19, 21 उल्लंघन। LGBTQ+ अधिकार मान्य। यौन अभिविन्यास निजी मामला। समावेशी समाज लक्ष्य।
48
K.S. Puttaswamy (Aadhaar) v. Union of India
[2018] 8 SCR 1; (2019) 1 SCC 1
संविधानआधार वैधता व सीमाएँ: आधार वैध, परंतु निजी कंपनियों के लिए अनिवार्य नहीं। डेटा संरक्षण उपाय अनिवार्य। मेटाडेटा सीमित उपयोग। गोपनीयता व पहचान संतुलन।
49
Jarnail Singh v. Lachhmi Narain Gupta
[2018] 10 SCR 663; (2018) 10 SCC 396
आरक्षणपदोन्नति आरक्षण व क्रीमी लेयर: SC/ST पदोन्नति आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू। 77वाँ संशोधन वैध। बैकलॉग भरने की सीमाएँ स्पष्ट। सामाजिक न्याय व दक्षता संतुलन।
50
Joseph Shine v. Union of India
[2018] 11 SCR 765; (2019) 3 SCC 39
आपराधिकव्यभिचार अपराध नहीं: धारा 497 असंवैधानिक। महिलाओं को संपत्ति नहीं, समान नागरिक माना जाएगा। विवाह समान भागीदारी। आपराधिक दंड निजी संबंधों में अनुचित।
51
CCI v. Bharti Airtel
[2018] 14 SCR 489; (2019) 2 SCC 521
प्रतिस्पर्धाCCI व TRAI क्षेत्राधिकार: सेक्टरल रेगुलेटर प्राथमिक। TRAI राय के बाद ही CCI हस्तक्षेप। विशेष कानून सामान्य पर हावी। दूरसंचार प्रतिस्पर्धा संरक्षित।
52
Swiss Ribbons v. Union of India
[2019] 3 SCR 535; (2019) 4 SCC 17
दिवालियापनIBC संवैधानिक वैध: वित्तीय व परिचालन लेनदार भेद वैध। समयबद्ध निपटान लक्ष्य। कोरल इंस्पिरास सिद्धांत पुष्टि। आर्थिक स्थिरता प्राथमिक। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित।
53
Ssangyong v. NHAI
[2019] 7 SCR 522; 2019 (15) SCC 131
मध्यस्थतापब्लिक पॉलिसी संकुचित: धारा 34 में हस्तक्षेप केवल गंभीर अनियमितता में। तथ्य पुनर्विचार निषिद्ध। मध्यस्थता अंतिमता सम्मानित। व्यावसायिक निश्चितता प्राथमिक।
54
Dr. Ashwani Kumar v. Union of India
[2019] 12 SCR 30; 2019 SCC Online SC 1144
संविधानCVC शक्तियाँ व पारदर्शिता: सतर्कता आयुक्त भूमिका स्पष्ट। जाँच प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य। सरकारी अधिकारी जवाबदेही बढ़ाई गई। भ्रष्टाचार रोकथाम प्राथमिक।
55
Rojer Mathew v. South Indian Bank
[2019] 16 SCR 1; (2020) 6 SCC 1
न्यायाधिकरणवित्त अधिनियम 2017 वैध: न्यायाधिकरण पुनर्गठन मान्य। कार्यपालिका को नियम बनाने में न्यायिक स्वतंत्रता सम्मानित। सदस्य योग्यता व कार्यकाल स्पष्ट। दक्षता लक्ष्य।
56
CPIO SC v. Subhash Chandra Agarwal
[2019] 16 SCR 424; (2020) 5 SCC 481
RTICJI कार्यालय RTI दायरे में: न्यायिक स्वतंत्रता व पारदर्शिता संतुलन। जानकारी साझा करने में सावधानी। प्रशासनिक कार्य पारदर्शी। न्यायिक गोपनीयता संरक्षित।
57
Essar Steel v. Satish Kumar Gupta
[2019] 16 SCR 275; (2020) 8 SCC 531
दिवालियापनCoC वाणिज्यिक निर्णय: न्यायिक समीक्षा से परे, सिवाय mala fide/कानून उल्लंघन के। वित्तीय लेनदार प्राथमिकता स्पष्ट। समयबद्ध निपटान लक्ष्य। आर्थिक पुनर्जीवन प्राथमिक।
58
Shanti Conductors v. Assam SEB
[2019] 16 SCR 252; (2020) 2 SCC 677
मध्यस्थताब्याज दर निर्धारण: पंचाट ब्याज दर तय कर सकती है। अनुबंध स्वतंत्रता सम्मानित। न्यायालय हस्तक्षेप केवल धारा 34 आधारों पर। वाणिज्यिक निश्चितता प्राथमिक।
59
Keisham Meghachandra v. Speaker Manipur
[2020] 2 SCR 132; 2020 (2) SCALE 329
संविधानदल बदल समयसीमा: स्पीकर को 3 महीने में निर्णय। विलंब न्यायिक हस्तक्षेप आधार। तटस्थ प्राधिकरण सिफारिश। राजनीतिक स्थिरता प्राथमिक। प्रक्रियात्मक न्याय अनिवार्य।
60
Sushila Aggarwal v. State (NCT Delhi)
[2020] 2 SCR 1; (2020) 5 SCC 1
आपराधिकजमानत शर्तें लचीली: जाँच पूर्ति पर जमानत रद्द करना कठिन। अनुच्छेद 21 स्वतंत्रता संरक्षित। व्यक्तिगत परिस्थितियाँ ध्यान योग्य। न्यायिक विवेक संतुलित।
61
Dheeraj Mor v. HC Delhi
[2020] 2 SCR 161; (2020) 7 SCC 401
विधिक शिक्षाकानून प्रवेश परीक्षाएँ वैध: 5 वर्षीय एकीकृत कार्यक्रम में AILET/CLAT मान्य। मानक व योग्यता स्पष्ट। गुणवत्ता शिक्षा लक्ष्य। प्रतिस्पर्धी चयन आवश्यक।
62
IAMAI v. RBI
[2020] 2 SCR 297; (2020) 10 SCC 274
बैंकिंगक्रिप्टो प्रतिबंध असंवैधानिक: आनुपातिकता सिद्धांत लागू। व्यापार/पेशे स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(g)) संरक्षित। RBI विनियमन सीमित। नवाचार व जोखिम संतुलन।
63
Indore Dev Authority v. Manoharlal
[2020] 3 SCR 1; (2020) 8 SCC 129
भूमिRFCTLARR Act व्याख्या: भूमि अधिग्रहण में मुआवजा व पुनर्विकास अनिवार्य। 2013 अधिनियम पुराने मामलों में सीमित लागू। पीड़ित पुनर्वास प्राथमिक। न्यायिक हस्तक्षेप संतुलित।
64
Madras Bar Assn v. Union of India
[2020] 2 SCR 246; 2020 (13) SCALE 443
न्यायाधिकरणNCLT सुधार: सदस्य नियुक्ति व कार्यकाल सुधार। 2 वर्ष न्यूनतम कार्यकाल। न्यायिक/तकनीकी संतुलन। दक्षता व निष्पक्षता लक्ष्य। पारदर्शिता अनिवार्य।
65
Nandini Sundar v. State of Chhattisgarh
[2011] 8 SCR 1028; (2011) 7 SCC 547
मानवाधिकारसलवा जुडुम असंवैधानिक: नागरिक सशस्त्र बल निषिद्ध। आदिवासी सुरक्षा व विकास राज्य कर्तव्य। अनुच्छेद 21 उल्लंघन रोकना आवश्यक। मानवाधिकार प्राथमिक।
66
Arnesh Kumar v. State of Bihar
[2014] 8 SCR 128; (2014) 8 SCC 273
आपराधिकधारा 498A गिरफ्तारी दिशा-निर्देश: 9 बिंदु जाँच अनिवार्य। तुरंत गिरफ्तारी निषिद्ध। दुरुपयोग रोकथाम उपाय। पुलिस विवेक संतुलित। महिला संरक्षण व पुरुष अधिकार संतुलन।
67
Abhiram Singh v. C.D. Commachen
[2017] 1 SCR 158; (2017) 2 SCC 629
चुनावधर्म/जाति प्रचार प्रतिबंध: धारा 123(3) व्यापक व्याख्या। धर्मनिरपेक्ष चुनाव प्रक्रिया अनिवार्य। समान अवसर लक्ष्य। सांप्रदायिकता रोकना प्राथमिक।
68
Neeraj Dutta v. State (NCT Delhi)
[2022] 5 SCR 104; (2023) 4 SCC 731
आपराधिकट्रैप एविडेंस सावधानियाँ: लुभाने वाले साक्ष्य में पूर्व संदेह व प्रक्रियात्मक सावधानियाँ अनिवार्य। संदेह लाभ आरोपी को। भ्रष्टाचार जाँच पारदर्शी। न्यायिक सतर्कता आवश्यक।
69
Sukhpal Singh Khaira v. State of Punjab
[2022] 10 SCR 156; (2023) 1 SCC 289
आपराधिकजमानत विलंब सिद्धांत: धारा 437/439 CrPC तहत विलंब जमानत आधार। जाँच पूर्ति महत्वपूर्ण। अनुच्छेद 21 स्वतंत्रता संरक्षित। न्यायिक विवेक संतुलित।
70
Satender Kumar Antil v. CBI
[2022] 10 SCR 351; (2022) 10 SCC 51
आपराधिकगिरफ्तारी से बचाव 4 श्रेणियाँ: जमानत योग्य अपराधों में गिरफ्तारी नहीं। डिजिटल प्रक्रिया व अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य। व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्राथमिक। पुलिस जिम्मेदारी स्पष्ट।
71
Janhit Abhiyan v. Union of India
[2022] 14 SCR 1; (2023) 5 SCC 1
संविधानEWS आरक्षण वैध: 103वाँ संशोधन मान्य। आर्थिक आधार आरक्षण मूल संरचना उल्लंघन नहीं। 50% सीमा अपवाद। सामाजिक न्याय विस्तारित। आनुपातिकता लागू।
72
Shilpa Sailesh v. Varun Sreenivasan
[2023] 5 SCR 165; (2023) 14 SCC 231
पारिवारिकपारस्परिक तलाक प्रतीक्षा माफ: धारा 13B(2) अवधि अनुच्छेद 142 तहत माफ संभव। टूटा विवाह बनाए रखना अनुचित। न्यायिक विवेक से राहत। मानवीय संवेदना प्राथमिक।
73
Kaushal Kishor v. State of UP
[2023] 8 SCR 581; (2023) 4 SCC 1
संविधानमौलिक अधिकार क्षैतिज प्रभाव: अधिकार केवल राज्य नहीं, बड़े व्यक्तियों/निगमों के खिलाफ भी लागू। अनुच्छेद 19/21 विस्तृत व्याख्या। नागरिक संरक्षण बढ़ाया गया।
74
Subhash Desai v. State of Maharashtra
[2023] 8 SCR 857; (2024) 2 SCC 719
संविधानराष्ट्रपति शासन प्रक्रिया: बहुमत परीक्षण व राज्यपाल भूमिका स्पष्ट। S.R. Bommai सिद्धांत पुष्टि। न्यायिक समीक्षा उपलब्ध। लोकतांत्रिक स्थिरता प्राथमिक।
75
Cox & Kings v. SAP India
[2023] 15 SCR 621; (2024) 4 SCC 1
मध्यस्थताअंतरिम राहत व पंचाट शक्ति: धारा 9/17 समन्वय स्पष्ट। न्यायालय व मध्यस्थ क्षेत्राधिकार संतुलित। व्यावसायिक निश्चितता प्राथमिक। प्रक्रियात्मक न्याय अनिवार्य।
76
In re: Arbitration & Stamp Act
[2023] 15 SCR 1081; (2024) 6 SCC 1
मध्यस्थतास्टाम्प शुल्क अनिवार्यता: बिना पर्याप्त स्टाम्प समझौता अयोग्य। भुगतान तक पंचात रुकेगी। संविधान पीठ निर्णय। राजस्व हित व मध्यस्थता संतुलन।
77
In re: Article 370
[2023] 16 SCR 1; 2023 SCC OnLine SC 1647
संविधानअनुच्छेद 370 रद्दीकरण वैध: विशेष दर्जा समाप्त। संसद शक्ति व राष्ट्रपति घोषणा मान्य। एकीकरण लक्ष्य। संवैधानिक प्रक्रिया पूर्ण। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित।
78
ADR v. UOI (Electoral Bonds)
[2024] 2 SCR 420; (2024) 5 SCC 1
चुनावइलेक्टोरल बॉन्ड असंवैधानिक: मतदाता जानकारी अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(a)) प्राथमिक। पारदर्शिता अनिवार्य। धन शक्ति प्रभाव रोका जाएगा। डेटा सार्वजनिक होगा।
79
Kavita Kamboj v. HC Punjab & Haryana
[2024] 2 SCR 1136; (2024) 7 SCC 103
न्यायपालिकान्यायाधीश नियुक्ति प्रक्रिया: कॉलेजियम सिफारिश व सरकार भूमिका स्पष्ट। पारदर्शिता व समयबद्धता अनिवार्य। न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखनी होगी। योग्यता प्राथमिक।
80
Sita Soren v. Union of India
[2024] 3 SCR 462; (2024) 5 SCC 629
संविधानविधायक प्रतिरक्षा सीमा: अनुच्छेद 105(2)/194(2) केवल सदन कार्य के लिए। रिश्वत में प्रतिरक्षा नहीं। P.V. Narasimha Rao पुनर्विचार। भ्रष्टाचार निषिद्ध।
81
State (NCT Delhi) v. BSK Realtors
[2024] 5 SCR 1159; (2024) 7 SCC 370
भूमिDDA भूमि नीति: पट्टा धारक अधिकार संरक्षित। पुनर्विकास नियम स्पष्ट। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित। नियामक प्रावधान प्राथमिक। न्यायसंगत मुआवजा आवश्यक।
82
MADA v. SAIL
[2024] 7 SCR 1549; (2024) 10 SCC 1
करखनिज शुल्क क्षेत्राधिकार: राज्य सरकार शक्ति स्पष्ट। सातवीं अनुसूची व वित्तीय संघवाद संतुलन। GST व खनन कर टकराव समाधान। राजस्व हित संरक्षित।
83
State of Punjab v. Davinder Singh
[2024] 8 SCR 1321; (2025) 1 SCC 1
आरक्षणउप-वर्गीकरण वैध: SC/ST आरक्षण में sub-classification मान्य। सबसे पिछड़े समूहों को न्यायसंगत हिस्सा। अनुच्छेद 14/16 संतुलन। सामाजिक न्याय विस्तारित।
84
AMU v. Naresh Agarwal
2024 SCC OnLine SC 3213
शिक्षाAMU अल्पसंख्यक दर्जा: अनुच्छेद 30(1) संरक्षण लागू। प्रवेश व प्रशासन स्वायत्तता। शैक्षणिक मानक बनाए रखने होंगे। संवैधानिक संरक्षण स्पष्ट।
85
Property Owners Assn v. State of Maharashtra
[2024] 11 SCR 1; 2024 SCC OnLine SC 3122
संविधानसंपत्ति अधिकार व्याख्या: जमींदारी उन्मूलन व 31A/31B स्पष्ट। कानूनी सुधार व मुआवजा सिद्धांत संतुलित। आर्थिक न्याय प्राथमिक। न्यायिक हस्तक्षेप सीमित।
86
Tej Prakash Pathak v. HC Rajasthan
[2024] 12 SCR 28; (2025) 2 SCC 1
न्यायपालिकान्यायाधीश स्थानांतरण व अनुशासन: कॉलेजियम प्रक्रिया व सरकार सहमति स्पष्ट। न्यायिक स्वतंत्रता बनाम जवाबदेही संतुलन। पारदर्शिता अनिवार्य। योग्यता प्राथमिक।
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